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काल गणना कैलेंडर का विमोचन

काल गणना कैलेंडर का विमोचन
काल गणना कैलेंडर का विमोचन
  • ‘चैत्र प्रतिपदा सृष्टि की उतपत्ति का दिवस है’
  • सांची विश्वविद्यालय में विक्रम संवत कैलेंडर का विमोचन
  • कुलसचिव ने किया कैलेंडर का विमोचन
  • ‘वैज्ञानिक गणना पर आधारित है कैलेंडर’
सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में आज चैत्र नवरात्र के रूप में भारतीय नववर्ष मनाते हुए विक्रम संवत आधारित कैलेंडर का विमोचन किया गया। विश्वविद्यालय के सभागार में कुलसचिव प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने शिक्षकों और अधिकारियों के साथ मंच पर विक्रम संवत कैलेंडर का विमोचन किया। उनका कहना था कि चैत्र प्रतिपदा सृष्टि की उतपत्ति का दिवस है।
इस अवसर पर प्रो. अल्केश ने कहा कि धरती का अयनांश हर 26 हज़ार साल बाद बदलता है। उनका कहना था कि भारतीय वैदिक काल में ही पृथवी की उतप्त्ति की गणना कर ली गई थी जिस की साढ़े चार अरब साल बताया गया है। प्रो. अल्केश चतुर्वेदी का कहना था कि वैदिक गणना के अनुसार अब तक 7 चतुर्युगों का एक युग होता है। एक-एक चतुर्युग 43 लाख वर्ष का होता है। वैदिक गणना के अनुसार अब तक 27 चतुर्युग हो चुके हैं।
प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने भारतीय वैदिक गणना का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण और महाभारत के लेखकों ने उन युगों के अनुसार ग्रह नक्षत्रों की गणना भी डाली है। राम और कृष्ण के जन्म के समय कौन सा युग था, कैसे ग्रह नक्षत्र थे इन सब के अनुसार आज भी वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पता लगाया जा सकता है। यहां तक की गंगा का अवतरण कब हुआ था आज भी गणना के आधार पर स्पष्ट बताया जा सकता है, यहां तक कि भागीरथी ने कैसे गंगा की दिशा बदल दी थी उसकी भी काल गणना की जा सकती है।
कुलसचिव प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने बताया कि प्लानेटोरियम सॉफ्टवेयर और अन्य सॉफ्टवेयरों के माध्यम से उस काल में हुई खगोलीय गणनाओं को जांचा जा सकता है। उन्होंने उज्जैन में 22-23 अप्रैल को होने वाली कॉन्फ्रेंस का भी ज़िक्र किया जिसमें पूरे देश का एक कैलेंडर बनाए जाने के लिए ज्योतिषी और वैज्ञानिक जुट रहे हैं।