12 मई 2025
बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भगवान बुद्ध के शांति और ज्ञान के संदेश को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। बौद्ध पूर्णिमा इस लिए भी खास है क्योंकि आज के ही दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने बुद्ध के शांति संदेश पर प्रकाश डालते हुए वैशाख पूर्णिमा की महत्ता और भगवान बुद्ध द्वारा प्राप्त कैवल्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित जनों को प्रेरित किया कि वे इन शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें। बुद्ध के सबसे प्रिय और निकटतम शिष्य आनंद बुद्ध के चचेरे भाई थे और उनके साथ लंबे समय तक रहे। आनंद को उनकी असाधारण स्मरण शक्ति और बुद्ध के उपदेशों को संकलित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है। जब बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ, तब आनंद ने ध्यानाभ्यास कर अर्हत पद प्राप्त किया। उन्होंने बौद्ध संघ में स्त्रियों को भिक्षुणी के रूप में शामिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर बोधिवृक्ष के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. नवीन कुमार मेहता ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में बुद्ध की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और सभी को इनके अनुरूप आचरण करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन बौद्ध अध्ययन विभाग के शोधार्थी अविनाश बर्मन ने किया। इस आयोजन ने बुद्ध पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया और उपस्थित जनों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से प्रेरित किया